हिंदी जगत

हिन्दी के आराधक भी थे उस्ताद सुलतान खान

"वो सारंगी के आराधक थे और हिन्दी के प्रेमी. अपनी सांसों से उन्होंने सारंगी में नई जान फूंकी और अपनी सुरीली आवाज से लोगो को प्रेम का सन्देश दिया.हम बात कर रहे है मशहूर सारंगी वादक और शास्त्रीय गायक उस्ताद सुलतान खान की. बहुत कम लोग जानते है कि जितना उन्हें संगीत से प्रेम था उतना ही अपनी भाषा से भी था.रविवार की रात उस्ताद ने अंतिम सांस ली. "

उस्ताद सुलतान खान, sarangi maestro and singer Ustad Sultan Khan

महज ११ साल की उम्र में जिस शख्स ने  पंडित रविशंकर के साथ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति दी हो उसकी प्रतिभा का अंदाजा लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है.पद्म भूषण से सम्मानित उस्ताद सुलतान खान ने सारंगी जैसे मीठे साज को एक नई पहचान दी. बहुत कम लोग ये जानते है कि उन्हें संगीत से जितना लगाव था उतना ही लगाव अपनी भाषा यानी हिन्दी के प्रति भी था. वे हमेशा हर जगह हिन्दी में बात करते थे और जब भी कोई  व्यक्ति उन्हें अंग्रेजी में बात करने को कहता तो वे तुरंत ऐसा जवाब देते थे कि सामने वाला  चुप हो जाता था.

अंग्रेजी में बात करने के किसे व्यक्ति के आग्रह पर उस्ताद कहते थे कि  मैं सिर्फ हिन्दी बोल सकता हूं, अनपढ़ हूं ना.. इसलिए अंग्रेजी नहीं आती. अपने करीबी लोगो से वो हमेशा कहते थे कि मै चाहू तो दो-तीन महीने अंग्रेजी सीख सकता हूँ, लेकिन मैं हिंदुस्तानी हूं और हमेशा हिन्दी में ही बात करुंगा.

सच्चा कलाकार अपनी मिट्टी से जुडा होता है उस मिट्टी की महक ही उसके साज में, आवाज में और उसके अंदाज में अभिव्यक्त होती है. ऐसे कई कलाकार है जो शोहरत पाने के बाद अपनी भाषा और भूषा बदल लेते है ऐसे लोगो के लिए उस्ताद सुलतान खान हमेशा आदर्श रहेंगे जिन्होंने सब कुछ हासिल करने के बाद भी अपनी भाषा को नहीं छोडा. हिन्दी जगत की ओर से  पिया बसन्ती रे.. काहे  सताए    आ जा ...... जैसे गीत को  आवाज देने जैसे कलाकार को  आत्मीय श्रद्धांजली....


प्रकाशन दिनांक : 28-11-2011
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