हिंदी जगत

बीमारी से लड़ रहा है हिन्दी गज़ल का एक चेहरा

"दुष्यंत कुमार के बाद हिन्दी के सबसे ज़्यादा चर्चित और प्रतिभाशाली गज़लकार श्री अदम गोंडवी यानी रामनाथ सिंह की हालत काफी नाजुक है. जनता की आवाज को अपनी ग़ज़लों में ढालकर लोगों के दिल तक पहुंचाने वाले वाले अदम साहब पिछले कुछ महीनों से लगातार बीमारी से जूझ रहे है.कुछ समय पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी और अपने जिगर के कारण उन्हें फिर से अस्पताल पहुँचना पडा. "

आम आदमी की आवाज -श्री अदम गोंडावी , hindi gazal, adam gondavi, dushyant kumar

अदम गोंडवी के नाम से विख्यात रामनाथ सिंह ने हिंदी गजल को अलग पहचान दी. आज के दौर में कवि और शायर अपने कलाम से ज़्यादा ध्यान अपने पहनावे पर देते है मगर अदम साहब इन सबसे अलग रहे. वे शुरू से ठेठ देसी अंदाज में मुशायरों में जाते थे. घुटनों तक बंधी मैली सी धोती, सिकुड़ा हुआ कुरता और गले में सफ़ेद गमछा डाले इस शायर को लोग गांव का किसान समझकर अनदेखा करते थे मगर गाँव का ये किसान जब अपनी गज़लें सुनाना शुरू करता तो लोग हैरान रह जाते थे.

महानगरों की चमकीली ज़िंदगी से सैकड़ो कोस दूर गोंडा के परसपुर गाँव में खेती करने वाले  इस किसान की ग़ज़लों में हिन्दुस्तान का असली चेहरा झांकता हुआ दिखता है. प्रचार से कोसों दूर रहने वाले अदम साहब की ग़ज़ले दोहराने वाले लोग भी  उनके नाम से अनजान है  ऐसे लोगो के लिए उनकी ये दो गज़लें काफी होगी..

जो उलझ कर रह गयी है फाइलों के जाल में
गाँव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में

बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह से खो गयी
राम सुधि की झौपड़ी सरपंच की चौपाल में

और

जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक़्क़ाम कर देंगे
कमीशन दो तो हिन्दोस्तान को नीलाम कर देंगे

ये बन्दे-मातरम का गीत गाते हैं सुबह उठकर
मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगुना दाम कर देंगे

 

सदन में घूस देकर बच गई कुर्सी तो देखोगे
वो अगली योजना में घूसखोरी आम कर देंगे

उनकी बात सीधे  सुनने वाले के दिल में उतरती है. अपनी सादगी से अदब को एक नई पहचान देने वाले अदम साहब इस वक्त बीमारी से घिरे है. आईये हम सब  दुआ करें कि वो  जल्दी से स्वस्थ हो और अपनी रचनाओं से आम आदमी की आवाज़ बुलंद करते रहें.इस वक्त उनके जैसे गज़लकार की बहुत ज़रूरत है.

उनकी कुछ और रचनाए कविता कोश के इस पृष्ठ पर देखी जा सकती है.


प्रकाशन दिनांक : 28-11-2011
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